हाँ नज़र आईवो ज़मीनउड़ते आसमान सेउन बादलों सेसाफ़ साफ़, सब कुछ थोड़ी पहचानीथोड़ी अजनबी सी लगीक्या रखा था नामकिस नाम से थी पहचानहाँ, ऐसा ही था कुछ ज़ुबान पे आते आते वो रह गयाजब पास पहुँचेंगे तो शायदयाद आएगाहर एक रस्ता, हर एक मंज़िलऔर वो सब कुछ फिर सोचेंगेउस ज़मीन पर रखें पाओंकी फिर सेContinue reading “Udta hoon uchayion mein”
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Morning Chai
ये चाय की प्याली समेटे है अपने में पूरी सुबह वो सुबह की ताजगीवो सौंधी सी महक और वो अपना ज़ायक़ा और उसमें घुली यादेंहै सुबह खूबसूरत जैसे ये चाय की प्याली
House of Wood
पेड़ के तने पर है एक काठ का घर है घर जैसा पर अपना नहीं कुछ तिनकों से सजाना होगा है सुंदर पर अभी अपना नहीं मोहब्बत से रंगना होगा ख़्वाहिशों को सच बनाना होगा तब होगा सच, अपना कल सिर्फ़ रहेगा एक सपना नहीं नये पंख उड़ेंगे अपना आसमान ढूँढेंगे होगी नई शुरुआत उनContinue reading “House of Wood”
Dhuan
है धुआँये जहांउड़ता हुआबहता हवाओं मेंफिर मिलता हैइन फ़िज़ाओं में कहाँउस आग से निकलाउस आग में दफ़नतू पहले था कहाँऔर कल होगा कहाँना तुझे खबरना कोई ग़ुमाये जहांहै बस धुआँ
Kai saal guzar gaye
उसी मंदिर की घास पर बैठे,नंगे पाओं।सर झुकाए इबादत मेंकई साल गुज़र गए । छोटे पाओं बड़े हो गयेदिल मगर सिकुड़ गये।दिल खोल के हंसेकई साल गुज़र गये । फ़र्श साफ़ सुथरा हैशायद पहले से महँगा।नंगे पाओं चलेकई साल गुज़र गये । है रास्ता वहीकदम चले सोच समझ केबेख़ौफ़ दौड़ेकई साल गुज़र गये । हैContinue reading “Kai saal guzar gaye”
kyun #Why
क्यों ये कैसा सवाल है इसका क्या फ़ायदा है क्यों पूछें है ये सब ऐसा क्या क़ायदा है क्यों याद करें वो जो हो गया है क्यों ढूँढें जो खो गया है क्यों कहें मन की किसने सुना है क्यों मायूस हों हुआ ही क्या है क्यों ये कैसा सवाल है इसके कई जवाब हैContinue reading “kyun #Why”
Ek khoobsurat si yaad
चलोरह जाते हैंइस लम्हे में कहींए ज़िंदगीतू गुज़र जा चलोरह जाते हैंइस मुस्कुराहट में कहींए उदासीतू गुज़र जा चलोबन जाते हैंएक ख़ूबसूरत सी यादए समयतू गुज़र जा बड़ी जल्दी हैए ज़िंदगी तुझेतेरे बेसब्र पैरों तलेकुचले गएफ़ुरसत भरे लम्हेकई ढूँढोगे जब वो ख़ुशीओर वो महकाती हँसीछोड़ा था जहांपाओगे वहीं उस आख़री मोड़ पेउस ढलती शाम कोरुकContinue reading “Ek khoobsurat si yaad”
Khamoshi
मैं ख़ामोश हूँमेरी चीख़ों को आवाज़ों कीज़रूरत नहीं ख़ामोश अल्फ़ाज़ों कोलफ़्ज़ों की बैसाखियों कीज़रूरत नहीं शब्दों में फ़रेब हैखामोशी में नहींबंद लबों कोक़समों कि ज़रूरत नहीं शब्दों में बनावट हैखामोशी में नहींदिल की गहराइयों मेंमन के बदलते मिज़ाज नहीं मैं ख़ामोश हूँमेरी सचाई कोकिसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं
Meri parchai dhoondhta hoon inme
उन ऊँचाइयों से देखा हैज़िंदगी को उड़ते हुएहवाओं का रुख़ जिस तरफ़ थाउसी रुख़ बहते हुए सूरज को ढलते देखा हैडूबते क्षितिज को रंगते हुएजैसा रंग खुद का थाउसी रंग में घुलते हुए पानी को बहते देखा हैठहरे पथरों पर छलाँगे भरते हुएजिस तरफ़ उसका अंत थाउसी समंदर की तरफ़ मदमस्त बहते हुए रोशनी कोContinue reading “Meri parchai dhoondhta hoon inme”
Dhund Hai, Dhoop hai
धुँध हैकी धूप हैसाँझ हैकी रूप हैरूप हैतो ढल जाएगाख़्वाब हैतो फिर आएगामुझे मत उठानामुझे सोने दोमुझे मेरे ख़्वाबों मेंरहने दोधूप मेंधुँध में
