Stillness of the deep

In the lakeLaying placidLies buriedmeanings deep Calm on the surfaceLike a pretending mirrorReflecting the fakeHiding the truth beneath the inquisitive fingerScratches the surfaceIn a poke of inquiryPierces the flimsy sheath Ripples give awaythe illusionDistorting the unrealRevealing the truth we seek It’s not the blue skyOr the ochre of the woodsIt’s the flow of the waterAndContinue reading “Stillness of the deep”

Khamoshi

मैं ख़ामोश हूँमेरी चीख़ों को आवाज़ों कीज़रूरत नहीं ख़ामोश अल्फ़ाज़ों कोलफ़्ज़ों की बैसाखियों कीज़रूरत नहीं शब्दों में फ़रेब हैखामोशी में नहींबंद लबों कोक़समों कि ज़रूरत नहीं शब्दों में बनावट हैखामोशी में नहींदिल की गहराइयों मेंमन के बदलते मिज़ाज नहीं मैं ख़ामोश हूँमेरी सचाई कोकिसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं

Nothing but you

Leave everythingthat is not youLeave no traces of youNot even few Scrape the edgesDown to the coreTill you are leftWith nothing more Shed the pretenceShed the prideRemove the nameleave the identity aside As we reachthe last crumbWe gnaw awaythe senses numb there in the stillnesswhen nothing is youWhat is leftIs nothing but you

Mera dost Andhera

रात आयी तोअंधेरा भी साथ आया हैदिन के उजाले मेंकहाँ उससे मिलना हो पाया है दिन के उजाले मेंरोशनी के पीछेशर्मिला सा, सहमा साछुपा रहता है शायद दिन की तपती धूप से राहत कीचादर लाया है अंधेरादोस्तों से मिल बैठने कामाहौल भी लाया है ये अंधेरा चाँद को साथ लिएकुछ रोशनी भी लाया हैटिमटिमाते तारोंContinue reading “Mera dost Andhera”

Who does it belong to (कौन है मालिक)

ड्रॉइंग रूम में सजी हर चीज़ जो किसी कारीगर की नायाब कारीगरी थी जिसे मजबूर हो कर बेचा गया था जो कभी दुकान के कोने में धूल से लथपथ अपने गले में अपनी क़ीमत लटकाए बेज़ुबान पड़े थे आज मेरे घर की रौनक़ है मोल दिया है अब वो सब मेरे हैं शायद ये एहसासContinue reading “Who does it belong to (कौन है मालिक)”

I still don’t win

It’s cold and windy My body lays bare The nature pitted against me It’s not even fair I close my eyes And I am still The wind passes me by I feel no chill In this battle with nature I still don’t win Because it’s not out there It’s there within