Khamoshi

मैं ख़ामोश हूँमेरी चीख़ों को आवाज़ों कीज़रूरत नहीं ख़ामोश अल्फ़ाज़ों कोलफ़्ज़ों की बैसाखियों कीज़रूरत नहीं शब्दों में फ़रेब हैखामोशी में नहींबंद लबों कोक़समों कि ज़रूरत नहीं शब्दों में बनावट हैखामोशी में नहींदिल की गहराइयों मेंमन के बदलते मिज़ाज नहीं मैं ख़ामोश हूँमेरी सचाई कोकिसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं

Who does it belong to (कौन है मालिक)

ड्रॉइंग रूम में सजी हर चीज़ जो किसी कारीगर की नायाब कारीगरी थी जिसे मजबूर हो कर बेचा गया था जो कभी दुकान के कोने में धूल से लथपथ अपने गले में अपनी क़ीमत लटकाए बेज़ुबान पड़े थे आज मेरे घर की रौनक़ है मोल दिया है अब वो सब मेरे हैं शायद ये एहसासContinue reading “Who does it belong to (कौन है मालिक)”

The Sixth string Analogy

I have devised a simple analogy based on the sixth string football matches played in the training academies to explain the daily working of the organisation. It explains the complex working and allows one to maintain sanity. Sharing it for the greater good. Sixth String is an elite group which is formed based on aContinue reading “The Sixth string Analogy”