Clothes ready to wear people

हो रहे तैयारकपड़ेइंसान पहनने कोधूप मेंसुबहफिर से जीने कोहैं तैयार आज कौन होगाकैसा होगाहर के नाप का एक हैएक घर हैएक इंसान हैजिसकी ज़िंदगी को जीनेहैं तैयार उसकी महकउसकी गंधअपने में पिरोएकभी उसकेजाने के बादमहकने कोहैं तैयार कभी नयाकभी पुरानाउस मौक़े के लिएया किसी की यादहर लम्हेको लिएहैं तैयार आस्तीन मेंछिपाये आंसूख़ुशी केदुख केवो सारीContinue reading “Clothes ready to wear people”

lenge udaan, Nange Paon

कौन सा बोझलिए चलते हैंकंधों पेकभी दिलों में साथ चलता दरिया हैछलकता साफ़ पानी हैचलो थोड़ा रुक जाएँकुछ देर ही सही वो सर पर रखाजो भारी बोझ हैकुछ देरउतार दें ज़मीन पर फिर सोचाकिसने देखा हैइस दरिया मेंचलो बहा दें और फिर बैठेंकुछ देर किनारे पेदेखें उस मैल कोघुलते हुए, बहते हुए और जब होContinue reading “lenge udaan, Nange Paon”

Buoyancy of Joy

This post was written in 2018. Wouldn’t remember the exact date of the scribble. Who really knows when did it get itched in the mind. The trigger was a stress ball which lay scarred in a corner, yet retaining the smiley face. It was published on this blog first on 12 Oct 2018. Re-Posting itContinue reading “Buoyancy of Joy”

Yes Wahin (हाँ वहीं)

हाँजाना हैवहाँतुम हो जहांऔरहो वहाँबसअपनावो गानाजो सुनाई देसिर्फ़ हमेंजो नाछेड़ेमखमली तनहाइयों कोजो हम ने ओड रखा हैहाँवहाँ सो जाना हैजहांतुम्हारी धड़कन होऔरतनहाई

The Grand Union (Sayujyam)

In middle of the nightor in the morning earlyHurtling down we cameWith speedsof tingling expectationsThrough the winding roadsof concrete and tarand through wistful misty memories In the courtyardwe gatherSome havingwise greys in the blackSome happy withFew strands of blacks in the greysEvery strand, howeverTelling different stories There we minglea part of every memorya carefree childInContinue reading “The Grand Union (Sayujyam)”

Ho shayad woh kharra

छोड़ दूँ वो सब जो तुम्हें लगे बुरा कुरेद कर नोच कर जो बचे हो शायद वो खरा और ना बचा कुछ अगर तो बस रहेगा दिल मोहब्बत भरा