Pakiza sa Rishta

Many times we yearn to win an argument. To have the last word. Sometimes it can actually be the ‘last words’. The words may be right, the logic may be flawless, yet something precious is quietly lost in the process. With time, we realize that the strongest relationships are not built on proving ourselves rightContinue reading “Pakiza sa Rishta”

Mauka ki pehchaan

इस मौके को पहचानता हूँ चूक गया था पिछली बार यहीं इस बार बड़ी मशक्कत की हैपूरा तैयार हूँ,इस बार बड़ी ताक लगा कर बैठा था जाने कैसे आँख लग गयी पलक झपकते मौक़ा गया एक बार फिर से वो शाम गयी अब ना किया, किसी मौके का इंतज़ार ना किया मशवरा अच्छे महुर्रत काContinue reading “Mauka ki pehchaan”

Tujhe mila kya hai

खोके सब कुछ  तुझे गिला क्या है  उम्र बीत गई  तुझे मिला क्या है  … काँच के पिंजरे के अलावा  तेरा क़िला क्या है  अपने सिवा और कोई तुझे मिला क्या है  … कहाँ का है तू  तेरा ज़िला क्या है एक तिनके से ज़्यादा तुझे मिला क्या है  … ख़ाली हाथ चल दिया हैContinue reading “Tujhe mila kya hai”

The night spoke

रात की बात  मुझसे हुई  खामोश रहे  कुछ लम्हे दोनों  फिर लंबी बात हुई  … डर नहीं लगता, क्या तुमको? उसने पूछा, सहम सहम कर  मैं ख़ुद हूँ डरा, और चकित हूँ  मुझसे मिलने  क्यों आया कोई  … फ़िर व्यथा  अपनी सुनाई  मेरे बारे  कुछ पूछा नहीं  कई अरसे का बांध भरा था  आज अचानकContinue reading “The night spoke”

Raat ki Maggi

रात की Maggiकुछ भूखकुछ बस यूँ ही कढ़ची घुमातेकरी ढेर सारी बातें कुछ संजीदा, कुछ बस यूँ ही डेढ़ ग्लास पानी मिलानाऔर, थोड़ा instructions से कुछ अलग करना जैसा है, वैसा सही था Carrot और मटर डाल कर उसे बर्बाद करना कोई reason नहीं पेट की नहीं मन की भूक है ज़्यादा कोई खाये elaborateकुछContinue reading “Raat ki Maggi”

Safed Baadal ke patte (leaves of White clouds)

होंगे सफ़ेद बादल के पत्ते मेरे  पर मैं ज़मीन से जुड़ा हूँ  गुज़रे कई साल  पर मैं यहीं पे खड़ा हुआ हूँ  ना आसमान मुझपे मौताज़ फिर भी उस यक़ीन पे रुका हूँ  की जब बरसेंगे वो बादल  तो कहीं, उस से जुड़ जाऊँगा मैं  https://mytaleswithin.com/2024/05/10/leaves-of-white-cloud/

Ye Khali Raat

ये ख़ाली रात इंतज़ार से भर गई जब समेटने लगे तो मोहब्बत के सिवा कुछ ना मिला नींद को लेके कहीं दूर चलीं हैं, कुछ फ़िक्र की झुर्रियाँऔर जब मुड के देखा तो रुकी हुई सुइयों के सिवा कुछ ना मिला कदम बड़े हिसाब से उठे लहरों से बच कर ज़िंदगी चली पाओं के निशानContinue reading “Ye Khali Raat”

Wahan Kaphila Milega

कई अल्फ़ाज़ यूँही रह गये खुले आसमान में कहीं बह गए। वहाँ बादलों से बारिश के साथ बरसेंगे उन बूँदों में कहीं शायद अपना क़ाफ़िला मिलेगा

Mere saath chala woh Chand

पुराने गाने सुनते रस्ता चला पेड़, खेत, नादिया पीछे छोड़ चला साथ चली बस हवा कुछ गुनगुनाती अच्छे सफ़र की देती दुआ और चला वो चाँद हर कदम मेरे साथ बादलों से गुज़रता, कुछ मुस्कुराता जानता है वो, शायद मेरे मन की बात