Mauka ki pehchaan

इस मौके को पहचानता हूँ चूक गया था पिछली बार यहीं इस बार बड़ी मशक्कत की हैपूरा तैयार हूँ,इस बार बड़ी ताक लगा कर बैठा था जाने कैसे आँख लग गयी पलक झपकते मौक़ा गया एक बार फिर से वो शाम गयी अब ना किया, किसी मौके का इंतज़ार ना किया मशवरा अच्छे महुर्रत काContinue reading “Mauka ki pehchaan”

Yun hi aksar

मैं सोचता हूँ  ये अक्सर  की ये दुनिया  जो बह रही है  चंचल, बेसब्र  नदी की तरह  किस तरफ़  का रुख़ है इसका  कौनसे सागर में  जा मिलती है ये आख़िर  कहाँ उसका  ठिकाना है  बस बह रही है  अटखेलियाँ लिए  तेज़ कदमों से  बस यूँ ही 

Dad, friend

वो सबका आसरा किसके काँधे, सर अपना वो रखे रखता वो, सब दिल में छिपाये जो हो रहा, ख़ामोश सब देखे कहता है, बस मुस्कुरा दो हर बात को हँसी में उड़ा दो सबका प्यारा, सबका चहेता ख़ुश रहते सब, उससे मिलके है कुछ परेशानियाँ, किसकी नहीं हैं कुछ रह गए अरमान, किसके पूरे हुएपरContinue reading “Dad, friend”

The book ends…and I am yet not sleepy

Have you ever felt the mixed feeling when the book is over. You feel maybe it could linger with you a bit longer. But like everything else, it also must end. But you still wait for a few words more… Another day to live…a few more hour with the beloved. One more hug… A lastContinue reading “The book ends…and I am yet not sleepy”

Kaise pehchanoge

कैसे पहचानोगे जो ख़ुद ने छिपा रखा है वो चेहरा अलग है जो नज़रों ने बना रखा है कई बार कोशिश की नक़ाब उतार फेंक देने की नक़ाब नज़रों ने अलग सा पहना रखा है जिस दिन अपना कवच निकाल, नंगे बदन में, दुनिया से मिलूँगा ख़ुद को दुनिया में दुनिया को खुदको में पाऊँगाContinue reading “Kaise pehchanoge”

I think I should get lost

मन कहता है  मैं हो जाऊँ घूम  … ना कुछ कहूँ  ना किसिको सुनाई दूँ  बस रहूँ  अंधेरे सा ना दिखाई दूँ  और बस घुल जाऊँ तारों की चमक मैं  रात कली की महक मैं  ठंडी हवाओं के झोंके में  … मन कहता है  मैं हो जाऊँ घूम 

Raat ki Maggi

रात की Maggiकुछ भूखकुछ बस यूँ ही कढ़ची घुमातेकरी ढेर सारी बातें कुछ संजीदा, कुछ बस यूँ ही डेढ़ ग्लास पानी मिलानाऔर, थोड़ा instructions से कुछ अलग करना जैसा है, वैसा सही था Carrot और मटर डाल कर उसे बर्बाद करना कोई reason नहीं पेट की नहीं मन की भूक है ज़्यादा कोई खाये elaborateकुछContinue reading “Raat ki Maggi”

Travel beyond (Bas chalna Hai)

मुड के देखा तो हसीन नज़ारे देखे क्या छोड़ आया हूँ क्या अब आगे है जो छोड़ आया हूँ अच्छा था जैसा भी था सच्चा था एक सफ़र है मंज़िल नहीं किसको पहुँचना बस मुझे चलना है