इस मौके को पहचानता हूँ चूक गया था पिछली बार यहीं इस बार बड़ी मशक्कत की हैपूरा तैयार हूँ,इस बार बड़ी ताक लगा कर बैठा था जाने कैसे आँख लग गयी पलक झपकते मौक़ा गया एक बार फिर से वो शाम गयी अब ना किया, किसी मौके का इंतज़ार ना किया मशवरा अच्छे महुर्रत काContinue reading “Mauka ki pehchaan”
Category Archives: Hindi poem
Takiye ka Geelapan (Wet pillows)
दर्द छिपाओगे तो, कहीं तो निकलेगा पूछेंगे वो जो हाल, तो क्या बतलाओगे? ——- कहीं तो नज़र आयेगा वो आँसू तकिये का गीलापन, कैसे छिपाओगे? —- मान गए वो, कहा करलो अपने मन की, सोच लो पूरी तरह से, क्या फिर भी कर पाओगे ? —- क्यों रखी ऐसी फ़रियाद, उनसे कौन पूछेगा ता उम्रContinue reading “Takiye ka Geelapan (Wet pillows)”
Aa mujhse aake mil
तू धूप है, क्यों दूर है दोस्त हूँ तेरा, आ मुझसे आके मिल तेरी रोशनी तू कैसे छिपायेगा मुझमें है तू छिपा, आ मुझसे आके मिल कल रात तू मिला नहींसोया नहीं मैं रात भर आ मुझ से आके मिल तुझसे है सब कुछ रोशन है मुझमें क्यों अँधेरा आ मुझसे आके मिल जल रहाContinue reading “Aa mujhse aake mil”
Koshish
किसी ने की कोशिश दो कदम चलने की उस नुक्कड़ पर फिर से मिलने की कोई कदम पहुँचे ही नहीं … किसी ने की कोशिश लिखे ख़त को पड़ने की पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से निकले ही नहीं … किसी ने की कोशिश दबी आवाज़ों को सुनने की अनकहे लफ़्ज़ोंContinue reading “Koshish”
Dad, friend
वो सबका आसरा किसके काँधे, सर अपना वो रखे रखता वो, सब दिल में छिपाये जो हो रहा, ख़ामोश सब देखे कहता है, बस मुस्कुरा दो हर बात को हँसी में उड़ा दो सबका प्यारा, सबका चहेता ख़ुश रहते सब, उससे मिलके है कुछ परेशानियाँ, किसकी नहीं हैं कुछ रह गए अरमान, किसके पूरे हुएपरContinue reading “Dad, friend”
Bus iske baad
अभी थोड़ा busy हूँइत्मीनान सेबात करते हैंबस इसके बाद हाँ करवाना हैfull body checkupplan करते हैंबस इसके बाद बड़ी देर सोच रहा हूँछुट्टी बहुत accumulate हो गई हैapply करता हूँबस इसके बाद वो नई picture देखनी हैसब कहते है बड़ी अच्छी हैbook करतें हैं onlineबस इसके बाद हर SundayDrive पे चलेंगेschedule बनाते हैंबस इसके बादContinue reading “Bus iske baad”
Elusive happiness
Dear Fog, my friend
The night spoke
रात की बात मुझसे हुई खामोश रहे कुछ लम्हे दोनों फिर लंबी बात हुई … डर नहीं लगता, क्या तुमको? उसने पूछा, सहम सहम कर मैं ख़ुद हूँ डरा, और चकित हूँ मुझसे मिलने क्यों आया कोई … फ़िर व्यथा अपनी सुनाई मेरे बारे कुछ पूछा नहीं कई अरसे का बांध भरा था आज अचानकContinue reading “The night spoke”
Ab sab poora sa lagne laga hai
ख्वाहिशें कुछ कम सी हो गई हैं खुश आजकल कुछ ज़्यादा रहने लगा हूँ … कम भी अब ज़्यादा लगने लगा है अपनी पुरानी चादर में रयीस सा लगने लगा हूँ … किसी रियासत का मालिक नहीं सारा जग अपना सा लगता है ढूँढता नहीं कोई ठिकाना हर ठिकाना अब अपना सा लगने लगाContinue reading “Ab sab poora sa lagne laga hai”
