Ab sab poora sa lagne laga hai

ख्वाहिशें कुछ  कम सी हो गई हैं  खुश आजकल  कुछ ज़्यादा रहने लगा हूँ  … कम भी अब  ज़्यादा लगने लगा है  अपनी पुरानी चादर में  रयीस सा लगने लगा हूँ  … किसी रियासत का मालिक नहीं  सारा जग अपना सा लगता है  ढूँढता नहीं कोई ठिकाना   हर ठिकाना अब अपना सा लगने लगाContinue reading “Ab sab poora sa lagne laga hai”

Morning Chai

ये चाय की प्याली समेटे है अपने में पूरी सुबह वो सुबह की ताजगीवो सौंधी सी महक और वो अपना ज़ायक़ा और उसमें घुली यादेंहै सुबह खूबसूरत जैसे ये चाय की प्याली

Ho shayad woh kharra

छोड़ दूँ वो सब जो तुम्हें लगे बुरा कुरेद कर नोच कर जो बचे हो शायद वो खरा और ना बचा कुछ अगर तो बस रहेगा दिल मोहब्बत भरा