Ab sab poora sa lagne laga hai

ख्वाहिशें कुछ  कम सी हो गई हैं  खुश आजकल  कुछ ज़्यादा रहने लगा हूँ  … कम भी अब  ज़्यादा लगने लगा है  अपनी पुरानी चादर में  रयीस सा लगने लगा हूँ  … किसी रियासत का मालिक नहीं  सारा जग अपना सा लगता है  ढूँढता नहीं कोई ठिकाना   हर ठिकाना अब अपना सा लगने लगाContinue reading “Ab sab poora sa lagne laga hai”