दर्द छिपाओगे तो,
कहीं तो निकलेगा
पूछेंगे वो जो हाल,
तो क्या बतलाओगे?
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कहीं तो नज़र आयेगा
वो आँसू
तकिये का गीलापन,
कैसे छिपाओगे?
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मान गए वो,
कहा करलो अपने मन की,
सोच लो पूरी तरह से,
क्या फिर भी कर पाओगे ?
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क्यों रखी ऐसी फ़रियाद,
उनसे कौन पूछेगा
ता उम्र कोशिश करूँगा,
तुम इंतिज़ार कर पाओगे ?








