yun hi behta hoon, nirantar

गुज़रती ज़िंदगी के, 

मचलती लहरों पर 

मेरा अक्स, 

कुछ बिगड़ा हुआ सा दिखा 

वक़्त की बेचैन लहरें 

अगर थम जाएँ 

तो है जो असल 

वो दिखायी दे 

तब तक यूँ ही 

बहता रहूँगा 

लहरों के साथ कभी 

लहरों से कश्मकश में कभी 

और गुज़रेगी ये ज़िंदगी 

यू ही बेबस, निरंतर 

कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)

घास के पत्तों को कुचले जाने की आदत है मेरी खवाइशों की भी कुछ कुछ ऐसी ही आदत है औस की बूँदों ने हर बार सम्भाला है ख़्वाहिशों की मौत को कई बार टाला है …

कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)

The trampled ones