Pakiza sa Rishta

Many times we yearn to win an argument. To have the last word. Sometimes it can actually be the ‘last words’. The words may be right, the logic may be flawless, yet something precious is quietly lost in the process. With time, we realize that the strongest relationships are not built on proving ourselves rightContinue reading “Pakiza sa Rishta”

Aa mujhse aake mil

तू धूप है, क्यों दूर है दोस्त हूँ तेरा, आ मुझसे आके मिल तेरी रोशनी तू कैसे छिपायेगा मुझमें है तू छिपा, आ मुझसे आके मिल कल रात तू मिला नहींसोया नहीं मैं रात भर आ मुझ से आके मिल तुझसे है सब कुछ रोशन है मुझमें क्यों अँधेरा आ मुझसे आके मिल जल रहाContinue reading “Aa mujhse aake mil”

Koshish

किसी ने की कोशिश दो कदम चलने की  उस नुक्कड़ पर  फिर से मिलने की  कोई कदम  पहुँचे ही नहीं … किसी ने की कोशिश  लिखे ख़त को पड़ने की पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की  कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से  निकले ही नहीं  … किसी ने की कोशिश  दबी आवाज़ों को सुनने की अनकहे लफ़्ज़ोंContinue reading “Koshish”

Bus iske baad

अभी थोड़ा busy हूँइत्मीनान सेबात करते हैंबस इसके बाद हाँ करवाना हैfull body checkupplan करते हैंबस इसके बाद बड़ी देर सोच रहा हूँछुट्टी बहुत accumulate हो गई हैapply करता हूँबस इसके बाद वो नई picture देखनी हैसब कहते है बड़ी अच्छी हैbook करतें हैं onlineबस इसके बाद हर SundayDrive पे चलेंगेschedule बनाते हैंबस इसके बादContinue reading “Bus iske baad”

Tujhe mila kya hai

खोके सब कुछ  तुझे गिला क्या है  उम्र बीत गई  तुझे मिला क्या है  … काँच के पिंजरे के अलावा  तेरा क़िला क्या है  अपने सिवा और कोई तुझे मिला क्या है  … कहाँ का है तू  तेरा ज़िला क्या है एक तिनके से ज़्यादा तुझे मिला क्या है  … ख़ाली हाथ चल दिया हैContinue reading “Tujhe mila kya hai”

The night spoke

रात की बात  मुझसे हुई  खामोश रहे  कुछ लम्हे दोनों  फिर लंबी बात हुई  … डर नहीं लगता, क्या तुमको? उसने पूछा, सहम सहम कर  मैं ख़ुद हूँ डरा, और चकित हूँ  मुझसे मिलने  क्यों आया कोई  … फ़िर व्यथा  अपनी सुनाई  मेरे बारे  कुछ पूछा नहीं  कई अरसे का बांध भरा था  आज अचानकContinue reading “The night spoke”

Kuch der aur. Sona chahta hoon

कुछ पढ़ना नहीं लिखना चाहता हूँ  और थोड़ी देर सोना चाहता हूँ  … अगर रास्ते में हूँ तुम्हारे  तो सरका दो  या बैठो मेरे साथ  चुप चाप, इत्मिनान से  … वक्त को भरना नहीं  गुज़रते हुए देखना चाहता हूँ  बारिश से बचना नहीं  जी भर के भीगना चाहता हूँ  … अगर कुछ छींटे तुमपर गिरContinue reading “Kuch der aur. Sona chahta hoon”