हो रहे तैयारकपड़ेइंसान पहनने कोधूप मेंसुबहफिर से जीने कोहैं तैयार आज कौन होगाकैसा होगाहर के नाप का एक हैएक घर हैएक इंसान हैजिसकी ज़िंदगी को जीनेहैं तैयार उसकी महकउसकी गंधअपने में पिरोएकभी उसकेजाने के बादमहकने कोहैं तैयार कभी नयाकभी पुरानाउस मौक़े के लिएया किसी की यादहर लम्हेको लिएहैं तैयार आस्तीन मेंछिपाये आंसूख़ुशी केदुख केवो सारीContinue reading “Clothes ready to wear people”
Tag Archives: Hindi poem
Uss dhun se juda
वहाँ भीड़ मेंकुछ दूरहूँ मैं एकटिमटिमाता ताराजुड़ा हूँ फिर भीउस धुन सेजो उस दिल से आती हैंऔर इस दिल में रहती है
Kashti ka kaunsa kinara?
कश्ती ले जाए मुझे उस पारजो मेरा किनारा है।कश्ती का है कौनसा किनारा?बहता पानी ही उसका किनारा है।
Meri parchai dhoondhta hoon inme
उन ऊँचाइयों से देखा हैज़िंदगी को उड़ते हुएहवाओं का रुख़ जिस तरफ़ थाउसी रुख़ बहते हुए सूरज को ढलते देखा हैडूबते क्षितिज को रंगते हुएजैसा रंग खुद का थाउसी रंग में घुलते हुए पानी को बहते देखा हैठहरे पथरों पर छलाँगे भरते हुएजिस तरफ़ उसका अंत थाउसी समंदर की तरफ़ मदमस्त बहते हुए रोशनी कोContinue reading “Meri parchai dhoondhta hoon inme”
Dhund Hai, Dhoop hai
धुँध हैकी धूप हैसाँझ हैकी रूप हैरूप हैतो ढल जाएगाख़्वाब हैतो फिर आएगामुझे मत उठानामुझे सोने दोमुझे मेरे ख़्वाबों मेंरहने दोधूप मेंधुँध में
Khwabon ka kaphila
ऐसा कौनसा ख़्वाब है जो सच्चा ना लगा ऐसा कौनसा मौक़ा है जो मुमकिन ना लगा पर सचाई और ख़्वाब में शायद नींद खुलने का फ़रक है नींद खुली और आँखें मलि आँखों के मैल के साथ सारे ख़्वाब भी धूल गए दिन की भाग दौड़ में वो मौक़ा भी खो गया हक़ीक़त बनने काContinue reading “Khwabon ka kaphila”
Social Distancing
शायद मुमकिन नहींफिर भी कोशिश कर लेता हैये दिल, समझता ही नहीं है मर्ज़ ऐसा हैकी दूरी हैदिलों की करीबी कुछ कम तो नहीं दूर होफिर भी तुम्हारा साथ हैये भी कुछ कम तो नहीं है
Bouquet of Life
ये ज़िंदगी क्या है पलों का गुलदस्ता हसीन पल तुम्हारे साथ गुज़रे लो ज़िंदगी हो गयी
Bliss
इतना सुकून है यहाँहर दिन की दौड़ से दूरकितना सुकून होगा वहाँइन सब से परेजहां तन्हाई मेंअकेलापन नहींखामोशी में जहांउदासी नहींबस दूरदुनिया से अलगख़ुशी से भी परेखुद के आस पासख़ामोशतनहाखुश
Khali haath aaye the, Khali haath jayenge
कौनसा पिटारा लेके जाओगे क्या क्या पसंद आया है कितनी लम्बी उम्र है उसमें कितनी ज़िंदगी है समेटने में उम्र गुज़ारी है इन संदूक़ों का क्या होगा बहुत भारी हो गयी है इस भोझ का क्या होगा दुआओं का पिटारा भरना है खवायिशों का पेट कहाँ भरा है हाथ ख़ाली रहने वाले हैं जहां अगलेContinue reading “Khali haath aaye the, Khali haath jayenge”
