Takiye ka Geelapan (Wet pillows)

दर्द छिपाओगे तो, कहीं तो निकलेगा  पूछेंगे वो जो हाल, तो क्या बतलाओगे? ——- कहीं तो नज़र आयेगा वो आँसू  तकिये का गीलापन, कैसे छिपाओगे? —- मान गए वो, कहा करलो अपने मन की,  सोच लो पूरी तरह से, क्या फिर भी कर पाओगे ? —- क्यों रखी ऐसी फ़रियाद, उनसे कौन पूछेगा ता उम्रContinue reading “Takiye ka Geelapan (Wet pillows)”