इस मौके को पहचानता हूँ
चूक गया था पिछली बार यहीं
इस बार बड़ी मशक्कत की है
पूरा तैयार हूँ,इस बार
बड़ी ताक लगा कर बैठा था
जाने कैसे आँख लग गयी
पलक झपकते मौक़ा गया
एक बार फिर से वो शाम गयी
अब ना किया, किसी मौके का इंतज़ार
ना किया मशवरा अच्छे महुर्रत का
रखा कदम मंजिल की तरफ़,
और वो मौक़ा अगली मोड़ पर मिल गया
