ढलती शाम सेरोशनी चुरा केअभी तो रात आयी है धीरे से, दबे पाओंअंधेरे की नरम रज़ाई ले केअभी तो रात आयी है थके बदन के लिएनींद का तोहफ़ा ले केअभी तो रात आयी है आँखें हो रहीं है बंदअब मिलेंगे ख़्वाबों सेअभी तो नींद आयी है लेंगे उड़ानइस दुनिया की बंदिशों से परेअभी तो पंखContinue reading “Raat”
Category Archives: Hindi poem
Pani ka tukda
टपकता होगाआसमानों सेवो पानी का टुकड़ाकिसी की तलाश मेंकिसी की आस में कभी मिलती होगीउसेवो नर्म घासकभी गिरता होगाबेदर्द ज़मीन परबस हार के सच्ची हो जो चाहतझुलसती विरह की आँच मेंवो फिर से तपेगाभाप बनके उड़ेगामिलेगा फिरउन बादलों से फिर बरसेगा वोघनघोरउसी आसमानों सेवो पानी का टुकड़ाकिसी की तलाश मेंकिसी की आस में
kyun #Why
क्यों ये कैसा सवाल है इसका क्या फ़ायदा है क्यों पूछें है ये सब ऐसा क्या क़ायदा है क्यों याद करें वो जो हो गया है क्यों ढूँढें जो खो गया है क्यों कहें मन की किसने सुना है क्यों मायूस हों हुआ ही क्या है क्यों ये कैसा सवाल है इसके कई जवाब हैContinue reading “kyun #Why”
Clothes ready to wear people
हो रहे तैयारकपड़ेइंसान पहनने कोधूप मेंसुबहफिर से जीने कोहैं तैयार आज कौन होगाकैसा होगाहर के नाप का एक हैएक घर हैएक इंसान हैजिसकी ज़िंदगी को जीनेहैं तैयार उसकी महकउसकी गंधअपने में पिरोएकभी उसकेजाने के बादमहकने कोहैं तैयार कभी नयाकभी पुरानाउस मौक़े के लिएया किसी की यादहर लम्हेको लिएहैं तैयार आस्तीन मेंछिपाये आंसूख़ुशी केदुख केवो सारीContinue reading “Clothes ready to wear people”
Uss dhun se juda
वहाँ भीड़ मेंकुछ दूरहूँ मैं एकटिमटिमाता ताराजुड़ा हूँ फिर भीउस धुन सेजो उस दिल से आती हैंऔर इस दिल में रहती है
lenge udaan, Nange Paon
कौन सा बोझलिए चलते हैंकंधों पेकभी दिलों में साथ चलता दरिया हैछलकता साफ़ पानी हैचलो थोड़ा रुक जाएँकुछ देर ही सही वो सर पर रखाजो भारी बोझ हैकुछ देरउतार दें ज़मीन पर फिर सोचाकिसने देखा हैइस दरिया मेंचलो बहा दें और फिर बैठेंकुछ देर किनारे पेदेखें उस मैल कोघुलते हुए, बहते हुए और जब होContinue reading “lenge udaan, Nange Paon”
Yes Wahin (हाँ वहीं)
हाँजाना हैवहाँतुम हो जहांऔरहो वहाँबसअपनावो गानाजो सुनाई देसिर्फ़ हमेंजो नाछेड़ेमखमली तनहाइयों कोजो हम ने ओड रखा हैहाँवहाँ सो जाना हैजहांतुम्हारी धड़कन होऔरतनहाई
Is there something more serene? Aur Sukun Kya Hai
एक प्यारा साथीअपना सुना हुआ सा गानाथोड़ी सी हवाधीरे से चलते लम्हेऔर सफ़र क्या है ठंडी खामोशीथोड़ी गरम साँसेना मौक़े की तलाशना कोई मायूसीऔर हासिल क्या है कुछ फ़ुरसतकुछ धूपठंडी घासऔर नंगे पाँवऔर सुकून क्या है
Diwali ki Shubkamnayen
शुभकामनाएँहै आपकोआजदिवाली की दीपों से सजीरोशनी से भरीरहे हर शामदिवाली सी नटखट पटाकों सेहँसी के ठहाकों सेभरी हो हर शामदिवाली सी दीयों की आँच सेभस्म हो मन का मैलशुभ हो ये रातदिवाली की शुभकामनाएँहै आपकोरोशनी कीदिवाली की
Ek Aur Baar
एक शहर पुरानायादों से भरा हुआयादों की डोर खींच लायी हैएक बार और हर लम्हा याद आया हैवो मोड़, वो हँसीफिर वही रास्तेएक बार और कहीं निशान मिट गएकहीं अब भी सजावट हैकिसी ने पुकारा हैएक बार और एक खुश लम्हायहीं रह गया थामिल कर हँसे हैंएक बार और ईंटों की ढेरइमारत बनेगीफिर घर बसेगाएकContinue reading “Ek Aur Baar”
