हो रहे तैयारकपड़ेइंसान पहनने कोधूप मेंसुबहफिर से जीने कोहैं तैयार आज कौन होगाकैसा होगाहर के नाप का एक हैएक घर हैएक इंसान हैजिसकी ज़िंदगी को जीनेहैं तैयार उसकी महकउसकी गंधअपने में पिरोएकभी उसकेजाने के बादमहकने कोहैं तैयार कभी नयाकभी पुरानाउस मौक़े के लिएया किसी की यादहर लम्हेको लिएहैं तैयार आस्तीन मेंछिपाये आंसूख़ुशी केदुख केवो सारीContinue reading “Clothes ready to wear people”
Category Archives: Hindi poem
Uss dhun se juda
वहाँ भीड़ मेंकुछ दूरहूँ मैं एकटिमटिमाता ताराजुड़ा हूँ फिर भीउस धुन सेजो उस दिल से आती हैंऔर इस दिल में रहती है
lenge udaan, Nange Paon
कौन सा बोझलिए चलते हैंकंधों पेकभी दिलों में साथ चलता दरिया हैछलकता साफ़ पानी हैचलो थोड़ा रुक जाएँकुछ देर ही सही वो सर पर रखाजो भारी बोझ हैकुछ देरउतार दें ज़मीन पर फिर सोचाकिसने देखा हैइस दरिया मेंचलो बहा दें और फिर बैठेंकुछ देर किनारे पेदेखें उस मैल कोघुलते हुए, बहते हुए और जब होContinue reading “lenge udaan, Nange Paon”
Yes Wahin (हाँ वहीं)
हाँजाना हैवहाँतुम हो जहांऔरहो वहाँबसअपनावो गानाजो सुनाई देसिर्फ़ हमेंजो नाछेड़ेमखमली तनहाइयों कोजो हम ने ओड रखा हैहाँवहाँ सो जाना हैजहांतुम्हारी धड़कन होऔरतनहाई
Is there something more serene? Aur Sukun Kya Hai
एक प्यारा साथीअपना सुना हुआ सा गानाथोड़ी सी हवाधीरे से चलते लम्हेऔर सफ़र क्या है ठंडी खामोशीथोड़ी गरम साँसेना मौक़े की तलाशना कोई मायूसीऔर हासिल क्या है कुछ फ़ुरसतकुछ धूपठंडी घासऔर नंगे पाँवऔर सुकून क्या है
Diwali ki Shubkamnayen
शुभकामनाएँहै आपकोआजदिवाली की दीपों से सजीरोशनी से भरीरहे हर शामदिवाली सी नटखट पटाकों सेहँसी के ठहाकों सेभरी हो हर शामदिवाली सी दीयों की आँच सेभस्म हो मन का मैलशुभ हो ये रातदिवाली की शुभकामनाएँहै आपकोरोशनी कीदिवाली की
Ek Aur Baar
एक शहर पुरानायादों से भरा हुआयादों की डोर खींच लायी हैएक बार और हर लम्हा याद आया हैवो मोड़, वो हँसीफिर वही रास्तेएक बार और कहीं निशान मिट गएकहीं अब भी सजावट हैकिसी ने पुकारा हैएक बार और एक खुश लम्हायहीं रह गया थामिल कर हँसे हैंएक बार और ईंटों की ढेरइमारत बनेगीफिर घर बसेगाएकContinue reading “Ek Aur Baar”
Khamosh tare
रात की चहल पहल मेंतारे ख़ामोश थेकुछ आवाज़ ना हो जाएबादल, चुपचाप चल रहे थेचाँद आधा चमक रहा थाशायद कुछ छुपाए हुए थावो कदम साथ साथ चल रहे थेऔर धड़कन भीकुछ ना कहाफिर भी कहानी कह गएवो गूंजती धड़कनऔर वो ख़ामोश तारे
Badlon ke Pare
बादलों के परे हूँ मैंशायदआसमान हूँ मैं ख़ुशियों की हवाओं मेंहै मेरी उड़ानफिर भी परेशान हूँ मैं अपने आप को ढूँढने निकला हूँअपने आप सेअनजान हूँ मैं फ़िज़ाओं में क़ैद हूँहाँ ख़ुदा नहीं हूँइंसान हूँ मैं
Destination wherever (Manzil Kahan)
सुबह कीख़ामोश रास्तों पररोशनी की किरण हूँ में रात कीसोए हुए अंधेरों कीपहली सुबह हूँ मैं ख़्वाबों के अधूरे अल्फ़ाज़ों कीअनकही कहानी हूँ में सफ़र कीअनजान राहों काअकेला राही हूँ मैं मंज़िलों कीपहचान नहीं हैंशायद पहुँच गया हूँ मैं
