बंधा हुआ हूँ अनगिनत बेड़ियों में फिर भी आसमान उठा रखा है
Category Archives: Hindi poem
Colours that colour the heart
Roshni ka Dayara “Boundaries of Light”
मेरी हस्ती का है रोशनी का दायरा रोशनी से लिपटा अंदर, साये से भरा रोका है मैंने रोशनी को नादान, उसके सामने खड़ातिनका उस रोशनी में रोक कर समझूँ अपने को बड़ाना हूँ मैं तो हो सिर्फ़ रोशनी पहचान जाऊँ जब अपनी असल कहानी नयी सुबह की भोर में दायरा सिकुड़ जाएगा बस रोशनी होगीसायाContinue reading “Roshni ka Dayara “Boundaries of Light””
Wahan Kaphila Milega
कई अल्फ़ाज़ यूँही रह गये खुले आसमान में कहीं बह गए। वहाँ बादलों से बारिश के साथ बरसेंगे उन बूँदों में कहीं शायद अपना क़ाफ़िला मिलेगा
Mere saath chala woh Chand
पुराने गाने सुनते रस्ता चला पेड़, खेत, नादिया पीछे छोड़ चला साथ चली बस हवा कुछ गुनगुनाती अच्छे सफ़र की देती दुआ और चला वो चाँद हर कदम मेरे साथ बादलों से गुज़रता, कुछ मुस्कुराता जानता है वो, शायद मेरे मन की बात
Kites in the Sky
रंग बिरंगी ढेर सारी पतंग कुछ कटी हुई और कुछ ऊँचाइयों को छूती हुई जो डोर से बंधी थी वो उड़ रही थी जो कट गई थी वो हवा के साथ बहती जा रही थी जब थक उड़ान थी पतंग पर हर की आस थी कट जाने पर अगले पतंग की तलाश थी कन्नी कसContinue reading “Kites in the Sky”
Haan, Abhi wala mauka sahi hai
लोग हैं, तो रिश्ते हैंरिश्ते हैं, तो ख़लिश भी कोई ग़लत है तो कोई सही भीइस भीड़ में कहीं एक हंसी छिपी थी अभी अभी तो इन आँखों में उसकी चमक दिखी थी चलो, उसे ढूँढते हैं करें कब शुरुआत ये सोचते हैं है मौक़े बहुतपर कौनसा मौक़ा सही हैये जो अभी वाला मौक़ा हैContinue reading “Haan, Abhi wala mauka sahi hai”
Yaadon ke Rishte
कुछ बातें जो हैं सिर्फ़ हमारीकुछ सचऔर कुछ जो अब सच बन गये हैं जब भी मिलेंगे फिर से दोहरायेंगेंसाथ हँसेंगेंऔर जब तनहा होंगे उन्हीं क़िस्सों को याद कर मुस्कुराएँगेइन क़िस्सों से जुड़े हैं इन्ही यादों का तो रिश्ता हैना खून का ना क़ानून का पर है बहुत पक्का और बहुत सच्चा
Golgappa – Sphere full of taste
गोलगप्पे खाने का है चाव बड़ा पर जल्दी खाने में है फ़िक्र बहुत खड़ा हूँ क़तार में अपने मौक़े के इंतज़ार में पर इस बार तय कर लिया है खाऊँगा अगला निवाला पूरे इत्मीनान से
Udta hoon uchayion mein
हाँ नज़र आईवो ज़मीनउड़ते आसमान सेउन बादलों सेसाफ़ साफ़, सब कुछ थोड़ी पहचानीथोड़ी अजनबी सी लगीक्या रखा था नामकिस नाम से थी पहचानहाँ, ऐसा ही था कुछ ज़ुबान पे आते आते वो रह गयाजब पास पहुँचेंगे तो शायदयाद आएगाहर एक रस्ता, हर एक मंज़िलऔर वो सब कुछ फिर सोचेंगेउस ज़मीन पर रखें पाओंकी फिर सेContinue reading “Udta hoon uchayion mein”
