लोग हैं, तो रिश्ते हैं
रिश्ते हैं, तो ख़लिश भी
कोई ग़लत है
तो कोई सही भी
इस भीड़ में कहीं
एक हंसी छिपी थी
अभी अभी तो
इन आँखों में
उसकी चमक दिखी थी
चलो, उसे ढूँढते हैं
करें कब शुरुआत
ये सोचते हैं
है मौक़े बहुत
पर कौनसा मौक़ा सही है
ये जो अभी वाला मौक़ा है
उसमें क्या कमी है
हाँ, मौक़े बहुत हैं
बस वक़्त की तो कमी है

