मैं ख़ामोश हूँमेरी चीख़ों को आवाज़ों कीज़रूरत नहीं ख़ामोश अल्फ़ाज़ों कोलफ़्ज़ों की बैसाखियों कीज़रूरत नहीं शब्दों में फ़रेब हैखामोशी में नहींबंद लबों कोक़समों कि ज़रूरत नहीं शब्दों में बनावट हैखामोशी में नहींदिल की गहराइयों मेंमन के बदलते मिज़ाज नहीं मैं ख़ामोश हूँमेरी सचाई कोकिसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं
Category Archives: Hindi poem
Wo mod hi nazar nahin aata
एक अंधेरा भी हैजो रोशन बहुत हैएक खामोशी हैजो कहानी कहे जा रही है मेरे साथ मेरा साया थारात हुई तो खो गया है शायदकल सुबह सुबह मिलेंगे उससेअभी अकेले चल पड़ा हूँ साथ साथ अंधेरा भी चल पड़ा हैऔर वो बातूनी खामोशी भीपूछे बिग़ैर अपने अकेले क़ाफ़िले मेंशामिल हो गया है बातों बातों मेंवक्तContinue reading “Wo mod hi nazar nahin aata”
Jana kahan hai
किस ओर जाना हैखुद जनता नहीं ।जिस तरफ़ कारवाँ चलाउस तरफ़ चल पड़ा हूँ मैं।
Ek sham guzri khushi ke saath
एक शाम गुज़रीसाथ ख़ुशी केबहुत हंसेठहाके लगा के लायी एक तोहफ़ाएक मुस्कुराहटएक हँसीख़ुशी अपने आँचल में छिपा के कई बातें कहीकुछ उसकी सुनीकहा सिर्फ़ जो अच्छा लगेबाक़ी सब मन में छिपा के गरम हाथों से छुआदिलों की गहराइयों कोबैठे साथ साथ जोहाथों में उसका हाथ लेके एक नमी सी महसूस कीमुस्कुराहट के पीछेग़म की परछाईंContinue reading “Ek sham guzri khushi ke saath”
Nayi dosti
फिर अजनबी हैंमुलाक़ात कामौक़ा ढूँढेंगेजान पहचान काबहाना ढूँढेंगेवो सहमी नज़र,उस मुस्कराहट काइशारा ढूँढेंगेनयी दोस्ती हैमोहब्बत का नयाफ़साना ढूँढेंगे
Tumse main hoon
तुम अलग नहींतुम मुझमें होआपस में कोईफ़ासला नहीं एक मुलाक़ातबरसों पहले हुई थीपहली मुलाक़ातबादलों में हुई कभी सफ़र सदियों का हैराह साथ गुज़ारी हैज़िंदगी की रेत परकदमों के निशान दो नहीं साथ जो गुज़राहर लम्हा बेमिसालअसल में या ख़्वाबों मेंतुम्हारे बिना कोई पल नहीं नाम जुड़ गया हैख़्वाब और उम्मीदें जुड़ गयीं हैंएक हस्ती हैमेरीContinue reading “Tumse main hoon”
Sawaal
नो पूछो सवालना जवाबों की उमीद रखोमोहब्बत है तो सिर्फ़मोहब्बत की उमीद रखो
Dhund Hai, Dhoop hai
धुँध हैकी धूप हैसाँझ हैकी रूप हैरूप हैतो ढल जाएगाख़्वाब हैतो फिर आएगामुझे मत उठानामुझे सोने दोमुझे मेरे ख़्वाबों मेंरहने दोधूप मेंधुँध में
Adhuri Tasveer
तस्वीर बनीथोड़ी अधूरीशायद कोई रंग रह गयाजो मेरे पास था ही नहींउन्हें ढूँढने निकला हूँ सुबह की घास में कुछसमंदर सा हराढलती साँझ मेंवो मायूस लाल रंग वो ऊँचे आसमान मेंवो गहरा नीलावो हस्ते कमल मेंमुस्कुराता हुआ पीला वो टूटते लहर मेंमैला सा सफ़ेदऔर उस पिघलती बर्फ़ वालाचमकीला सफ़ेद हर अनोखा रंग समेट करवहाँ पहुँचाContinue reading “Adhuri Tasveer”
Khwabon ka kaphila
ऐसा कौनसा ख़्वाब है जो सच्चा ना लगा ऐसा कौनसा मौक़ा है जो मुमकिन ना लगा पर सचाई और ख़्वाब में शायद नींद खुलने का फ़रक है नींद खुली और आँखें मलि आँखों के मैल के साथ सारे ख़्वाब भी धूल गए दिन की भाग दौड़ में वो मौक़ा भी खो गया हक़ीक़त बनने काContinue reading “Khwabon ka kaphila”
