Bhul gaya sab kuch

भूलना हैबहुत कुछक्या क्या भुलाओगेये बताओ अगर याद करोगेवो सबतो फिर कैसे भुलाओगेये बताओ हर लम्हा नया हैसाफ़ सुथरा हैइसमें पुराने रंग क्यों भरेंये बताओ ख़ुशियों से भर देंइस लमहें कोआने वाला कल इसमें बसा हैइसे सजाओ ज़िंदा होतो जी लो ख़ुशी सेहर पल ज़िंदगी कालुफ्त उठाओ गहरी नींद में सो रहा हूँशायद सुबह होContinue reading “Bhul gaya sab kuch”

Raat

ढलती शाम सेरोशनी चुरा केअभी तो रात आयी है धीरे से, दबे पाओंअंधेरे की नरम रज़ाई ले केअभी तो रात आयी है थके बदन के लिएनींद का तोहफ़ा ले केअभी तो रात आयी है आँखें हो रहीं है बंदअब मिलेंगे ख़्वाबों सेअभी तो नींद आयी है लेंगे उड़ानइस दुनिया की बंदिशों से परेअभी तो पंखContinue reading “Raat”

Pani ka tukda

टपकता होगाआसमानों सेवो पानी का टुकड़ाकिसी की तलाश मेंकिसी की आस में कभी मिलती होगीउसेवो नर्म घासकभी गिरता होगाबेदर्द ज़मीन परबस हार के सच्ची हो जो चाहतझुलसती विरह की आँच मेंवो फिर से तपेगाभाप बनके उड़ेगामिलेगा फिरउन बादलों से फिर बरसेगा वोघनघोरउसी आसमानों सेवो पानी का टुकड़ाकिसी की तलाश मेंकिसी की आस में

Grime sticks on the dishes

The grime stuck stubbornly on the plate. Blood red, dried and flaky, remnant of the meal, they never finished. It started amicably but then turned toxic, like how it had always been. It was a relief if some of the dishes actually reached the sink. Rest unfortunate ones shattered on her face and stained walls.Continue reading “Grime sticks on the dishes”