Aaj Vela hoon

आज अकेला हुं
सुबह से वेला हूं
दुनिया को बचाने
अपने घर पे सोयेला हूं

भ्रमण कर आज
घर वापस आया हूं
कश्मीर से कन्याकुमारी का सफर
वास्तव में कर आया हूं

इंसान को ६ फीट दूर से देखा तो
थोड़ा डरा हुआ पाया है
हर आंखों में शक और कौफ का साया
भरपूर नजर आया है

इस नासूर वायरस
का वास्ता है
डर जातें हैं सब
जब कोई खांसता है

इन काले बादलों में मैंने
छिपे सिल्वर लाइनिंग को भी देखा है
भागते लम्हों को आज
चलते हुए देखा है

schedule wali डेयरी को दिया धोका
और टाइम को दिया रोका
मिला है थोड़ा सोचने का मौका
और कुछ नज़रिए का नया झरोखा

आज अकेला हुं
सुबह से वेला हूं
दुनिया को बचाने के चक्कर में
अपने आप से आज मिलेला हूं

दीवार पे तस्वीर

दीवारों पे टंगी तस्वीर ने
बेजुबान कई कहानियां
अतीत की आवाज़ चुरा कर
आज मुझे सुनाया है

कैद कर वो लम्हा
तस्वीरों के बेजान पन्नों पर
फिर आज जैसे
वही एहसास लौट आया है

नज़र धुंधला गई है
आंखे नम हो गई है
तस्वीर वहीं दीवार पे थम गई है
पर अरमानों ने उड़ान भर ली है

समय की सूइयों को
मोड़ने का ख्याल आया है
उस लम्हे को फिर से
जीने का ख्वाब सजाया है

समय की रेत को टटोला
तो वो लम्हा हाथ आया है
उसी लम्हें में पूरी उम्र
गुजारने का ख्याल आया है

वहां हमेशा तक

यूहीं साथ चले
कुछ देर तक
कुछ दूर तक

यूहीं साथ चले
कदमों के निशान
समय की रेत पर

ऐसा लगा
कल की बात है
साल २२ बीत गए

बातों बातों में
वक़्त का पता ना चला
कई कहानियां कह गए

कुछ मीठे
कुछ तीखे
कई पकवान सज गए

जिस्म अलहदा सही
अपने काम में मशरूफ कभी
एहसास गहरे रह गए

कदम साथ यूं चले
एक हस्ती रह गई
बाकी निशान मिट गए

यूंही चल पड़े
साथ साथ
कुछ दूर तक
वहां हमेशा तकl