Kaise pehchanoge

कैसे पहचानोगे जो ख़ुद ने छिपा रखा है वो चेहरा अलग है जो नज़रों ने बना रखा है कई बार कोशिश की नक़ाब उतार फेंक देने की नक़ाब नज़रों ने अलग सा पहना रखा है जिस दिन अपना कवच निकाल, नंगे बदन में, दुनिया से मिलूँगा ख़ुद को दुनिया में दुनिया को खुदको में पाऊँगाContinue reading “Kaise pehchanoge”