दीवार पे तस्वीर

दीवारों पे टंगी तस्वीर ने
बेजुबान कई कहानियां
अतीत की आवाज़ चुरा कर
आज मुझे सुनाया है

कैद कर वो लम्हा
तस्वीरों के बेजान पन्नों पर
फिर आज जैसे
वही एहसास लौट आया है

नज़र धुंधला गई है
आंखे नम हो गई है
तस्वीर वहीं दीवार पे थम गई है
पर अरमानों ने उड़ान भर ली है

समय की सूइयों को
मोड़ने का ख्याल आया है
उस लम्हे को फिर से
जीने का ख्वाब सजाया है

समय की रेत को टटोला
तो वो लम्हा हाथ आया है
उसी लम्हें में पूरी उम्र
गुजारने का ख्याल आया है

वहां हमेशा तक

यूहीं साथ चले
कुछ देर तक
कुछ दूर तक

यूहीं साथ चले
कदमों के निशान
समय की रेत पर

ऐसा लगा
कल की बात है
साल २२ बीत गए

बातों बातों में
वक़्त का पता ना चला
कई कहानियां कह गए

कुछ मीठे
कुछ तीखे
कई पकवान सज गए

जिस्म अलहदा सही
अपने काम में मशरूफ कभी
एहसास गहरे रह गए

कदम साथ यूं चले
एक हस्ती रह गई
बाकी निशान मिट गए

यूंही चल पड़े
साथ साथ
कुछ दूर तक
वहां हमेशा तकl

The elements – That’s me

Long day unwinds
tired limbs drag
Weary eyes burn
i feel the fire

walking in the wood
towards the sunset
leaves crumble beneath my feet
i feel the earth

taller than the trees
rays paint my face golden
breeze ruffle my curls
i feel the air

staying still and calm
feet dipped in the flow
cool till the soul
i feel the water

the skin is shed
and the within too
I merge
i am the space