Melting Boundaries (Pighalte Dayre)

कुछ दायरे
कुछ रस्मों रिवाज
मेरी हदें तय किया करती हैं

मेरा वजूद
मेरा मज़हब
मेरी पहचान बताया करती हैं

मुझे कहाँ जाना है
मुझे क्या करना है
अक्सर ये बयान करती हैं

किनारों में रहकर महफ़ूज़ रहा हूँ
मुक़र्रर मंज़िल की तरफ़ लाचार बहता रहा हूँ
अपनी पहचान भूल, खारा हो गया हूँ

समंदर मेरी मंज़िल नहीं
मैं कोई दरिया भी नहीं
मैं तो पानी हूँ
मेरा कोई किनारा ही नहीं

उन दायरों को
पिघलते देखा है
अपने ज़हन को खुलते देखा है

पानी को बेख़ौफ़ बहते देखा है
अपनी ख़्वाहिशों की ओर, किनारों के परे
लहरों को रास्ता बनाते देखा है
लहरों को रास्ता बनाते देखा है

Rhythmic dust clouds

The faraway drum beats
Raising a rhythmic dust clouds
Under the involuntary foot taps

The happy giggles and joyous laughter
Curling the amused lips
Eyes, giving away the forlorn perhaps

The celebration of togetherness
Marking the festive reunion
Complete with the memories intact

Far away enwrapped in the cocoon of silence
smiling to myself,
Tickled by happy memories
Dawn the realisation that…
Iam with you infact

Enmeshed in the heady spirit
Resonating with the musical notes
Smiling along
With the infectious laughter

Enthralled,
by the faraway drum beats
Oblivious of the rhythmic dust cloud
Under the involuntary foot taps

Unseen, unheard
Yet there…somewhere

Khali haath aaye the, Khali haath jayenge

कौनसा पिटारा लेके जाओगे
क्या क्या पसंद आया है
कितनी लम्बी उम्र है
उसमें कितनी ज़िंदगी है

समेटने में उम्र गुज़ारी है
इन संदूक़ों का क्या होगा
बहुत भारी हो गयी है
इस भोझ का क्या होगा

दुआओं का पिटारा भरना है
खवायिशों का पेट कहाँ भरा है
हाथ ख़ाली रहने वाले हैं
जहां अगले सफ़र पे जाना है

Koshish

किसी ने की कोशिश
दो कदम चलने की
उस नुक्कड़ पर फिर से मिलने की
कोई कदम पहुँचे ही नहीं

किसी ने की कोशिश
लिखे ख़त को पड़ने की
पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की
कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से निकले नहीं

किसी ने की कोशिश
दबी आवाज़ को सुनने की
अनकहे लफ़्ज़ों को समझने की
कुछ शोर अनसुने ही रहे

किसी को सुनाई दिया
किसी से हुई मुलाक़ात
किसी को आया समझ
किसी की नियत ही नहीं