Who does it belong to (कौन है मालिक)

ड्रॉइंग रूम में सजी हर चीज़ जो किसी कारीगर की नायाब कारीगरी थी जिसे मजबूर हो कर बेचा गया था जो कभी दुकान के कोने में धूल से लथपथ अपने गले में अपनी क़ीमत लटकाए बेज़ुबान पड़े थे आज मेरे घर की रौनक़ है मोल दिया है अब वो सब मेरे हैं शायद ये एहसासContinue reading “Who does it belong to (कौन है मालिक)”