Koshish

किसी ने की कोशिश दो कदम चलने की  उस नुक्कड़ पर  फिर से मिलने की  कोई कदम  पहुँचे ही नहीं … किसी ने की कोशिश  लिखे ख़त को पड़ने की पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की  कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से  निकले ही नहीं  … किसी ने की कोशिश  दबी आवाज़ों को सुनने की अनकहे लफ़्ज़ोंContinue reading “Koshish”

Dad, friend

वो सबका आसरा किसके काँधे, सर अपना वो रखे रखता वो, सब दिल में छिपाये जो हो रहा, ख़ामोश सब देखे कहता है, बस मुस्कुरा दो हर बात को हँसी में उड़ा दो सबका प्यारा, सबका चहेता ख़ुश रहते सब, उससे मिलके है कुछ परेशानियाँ, किसकी नहीं हैं कुछ रह गए अरमान, किसके पूरे हुएपरContinue reading “Dad, friend”

Bus iske baad

अभी थोड़ा busy हूँइत्मीनान सेबात करते हैंबस इसके बाद हाँ करवाना हैfull body checkupplan करते हैंबस इसके बाद बड़ी देर सोच रहा हूँछुट्टी बहुत accumulate हो गई हैapply करता हूँबस इसके बाद वो नई picture देखनी हैसब कहते है बड़ी अच्छी हैbook करतें हैं onlineबस इसके बाद हर SundayDrive पे चलेंगेschedule बनाते हैंबस इसके बादContinue reading “Bus iske baad”

The night spoke

रात की बात  मुझसे हुई  खामोश रहे  कुछ लम्हे दोनों  फिर लंबी बात हुई  … डर नहीं लगता, क्या तुमको? उसने पूछा, सहम सहम कर  मैं ख़ुद हूँ डरा, और चकित हूँ  मुझसे मिलने  क्यों आया कोई  … फ़िर व्यथा  अपनी सुनाई  मेरे बारे  कुछ पूछा नहीं  कई अरसे का बांध भरा था  आज अचानकContinue reading “The night spoke”

Ab sab poora sa lagne laga hai

ख्वाहिशें कुछ  कम सी हो गई हैं  खुश आजकल  कुछ ज़्यादा रहने लगा हूँ  … कम भी अब  ज़्यादा लगने लगा है  अपनी पुरानी चादर में  रयीस सा लगने लगा हूँ  … किसी रियासत का मालिक नहीं  सारा जग अपना सा लगता है  ढूँढता नहीं कोई ठिकाना   हर ठिकाना अब अपना सा लगने लगाContinue reading “Ab sab poora sa lagne laga hai”

Teri dhun mein rehta hoon

हर काम अधूरा करता हूँ हर बार, वक्त से पीछे रहता हूँ कुछ रखता हूँ यादों में  और कुछ भुलाया करता हूँ तेरी ही धुन में रहता हूँ  यूँ ही, हर वक्त, मगन  एक ये काम, मुक्कम्मल बेशक, मैं पूरा करता हूँ 

Kuch der aur. Sona chahta hoon

कुछ पढ़ना नहीं लिखना चाहता हूँ  और थोड़ी देर सोना चाहता हूँ  … अगर रास्ते में हूँ तुम्हारे  तो सरका दो  या बैठो मेरे साथ  चुप चाप, इत्मिनान से  … वक्त को भरना नहीं  गुज़रते हुए देखना चाहता हूँ  बारिश से बचना नहीं  जी भर के भीगना चाहता हूँ  … अगर कुछ छींटे तुमपर गिरContinue reading “Kuch der aur. Sona chahta hoon”