Why? Kyun

क्यों  गुज़र रहा है वक़्त  अब तो रुक जा  यूँ ही बैठे रहें  कुछ गुनगुनाते हुए  अब तो बहक जा  मख़मली धूप में घुल कर  छलकते दरिया में बहकर  बस ठहर जा क्या जल्दी है  कहाँ जाना है  मैं यहाँ हूँ  पहुँच गया हूँ  जहां जाना है  अब कुछ देर  ज़रा ठहर जायें  वक़्त गुज़रताContinue reading “Why? Kyun”

Travel beyond (Bas chalna Hai)

मुड के देखा तो हसीन नज़ारे देखे क्या छोड़ आया हूँ क्या अब आगे है जो छोड़ आया हूँ अच्छा था जैसा भी था सच्चा था एक सफ़र है मंज़िल नहीं किसको पहुँचना बस मुझे चलना है