
हाँ नज़र आई
वो ज़मीन
उड़ते आसमान से
उन बादलों से
साफ़ साफ़, सब कुछ
थोड़ी पहचानी
थोड़ी अजनबी सी लगी
क्या रखा था नाम
किस नाम से थी पहचान
हाँ, ऐसा ही था कुछ
ज़ुबान पे आते आते वो रह गया
जब पास पहुँचेंगे तो शायद
याद आएगा
हर एक रस्ता, हर एक मंज़िल
और वो सब कुछ
फिर सोचेंगे
उस ज़मीन पर रखें पाओं
की फिर से लें उड़ान
है अभी वक़्त
बहुत ज़्यादा, और थोड़ा कुछ
में हूँ वहाँ
और यहाँ भी
अभी तो ना ज़मीन पे हूँ
ना आसमान पर
सब से परे हूँ, थोड़ा कुछ
लंबी उड़ान है
अब दूर हूँ
उड़ता हूँ उचायीओं में
जहां कुछ नहीं
और है सब कुछ








