Toh aur kya hai?

समय की बदलती रेत पर ठंडी लहरों का खेल मेरे गालों पर, ये तुम्हारी, ग़ुस्ताख़ उँहलियाँ नहीं तो और क्या है नरम धूप से पिघलती ओससुबह सुबह नींद से भरी ये तुम्हारी, वो आँखें नहीं तो और क्या है ये महकती हवाजो मुझे मदहोश कर दे ये तुम्हारी, गरम साँसें नहीं तो और क्या हैContinue reading “Toh aur kya hai?”