Udaan

ऊँचायीयों से डर लगता है गिरने का खौफ है उड़ने का हुनर, सीखा नहीं गिरने का शोक है क्या फ़रक है कौनसा सही एक उभरता है एक ढलता है दोनों सिरों में डोर तो एक है एक पाने में जुटा है एक खोने में खुश है

कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)

घास के पत्तों को कुचले जाने की आदत है मेरी खवाइशों की भी कुछ कुछ ऐसी ही आदत है औस की बूँदों ने हर बार सम्भाला है ख़्वाहिशों की मौत को कई बार टाला है ज़मीन से जुड़ा हूँ मैंने कहाँ जाना है कुचलते कदम गुज़ार जाएँगे मेरा तो यहीं ठिकाना है किसकी जुस्तजू हैContinue reading “कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)”