कोई आज मुस्कुराया है

कुछ खोया नहीं सब पाया हैजो बांट दियावो कहां गवाया है इनसे मिला हूंउनको पहचानता नहींसब अपने है कौन पराया है ये शोहरत का क्याआज है कल नहींदुआओं को हमेशाअपने साथ पाया है कोई याद रखेऐसी ख्वाहिश तो नहींलम्हे खुशी के याद करकेकोई तो मुकुराया है

एक और एज़फा सिफर हो गया

डायरी में काम लिख करपूरा दिन भर दियालो एक दिन और गुजर गयाएक और इज़ाफ़ा सिफर हो गया ये लिस्ट लंबी है अभी काम बाकी है वक्त का हर लम्हा भर सा गया हैएक और दिन इसी होड मेंबिसर हो गया रस्ता लंबा हैपेड़ों का साया पीछे रह गयारुकने का वक्त मुकर्रर नहीं कियाहर नज़ाराContinue reading “एक और एज़फा सिफर हो गया”