ये आँखेंसब देखती हैक़सूर क्या इनका हैमन का शीशा हैजो बिखरा हुआ है कौन सी बातें हैंजो कहें हमजो अछी लगेंशब्दों का ज़ायक़ाकुछ बिगड़ा हुआ है सारा जहां ज़हन में हैक्यूँ फ़िज़ूलजमाने से ख़फ़ा हैंमन का चश्मा हैजो ज़रा पोशिदा है
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Social Distancing
शायद मुमकिन नहींफिर भी कोशिश कर लेता हैये दिल, समझता ही नहीं है मर्ज़ ऐसा हैकी दूरी हैदिलों की करीबी कुछ कम तो नहीं दूर होफिर भी तुम्हारा साथ हैये भी कुछ कम तो नहीं है
Bouquet of Life
ये ज़िंदगी क्या है पलों का गुलदस्ता हसीन पल तुम्हारे साथ गुज़रे लो ज़िंदगी हो गयी
Melting Boundaries (Pighalte Dayre)
कुछ दायरेकुछ रस्मों रिवाजमेरी हदें तय किया करती हैं मेरा वजूदमेरा मज़हबमेरी पहचान बताया करती हैं मुझे कहाँ जाना हैमुझे क्या करना हैअक्सर ये बयान करती हैं किनारों में रहकर महफ़ूज़ रहा हूँमुक़र्रर मंज़िल की तरफ़ लाचार बहता रहा हूँअपनी पहचान भूल, खारा हो गया हूँ समंदर मेरी मंज़िल नहींमैं कोई दरिया भी नहींमैं तोContinue reading “Melting Boundaries (Pighalte Dayre)”
कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)
घास के पत्तों को कुचले जाने की आदत है मेरी खवाइशों की भी कुछ कुछ ऐसी ही आदत है औस की बूँदों ने हर बार सम्भाला है ख़्वाहिशों की मौत को कई बार टाला है ज़मीन से जुड़ा हूँ मैंने कहाँ जाना है कुचलते कदम गुज़ार जाएँगे मेरा तो यहीं ठिकाना है किसकी जुस्तजू हैContinue reading “कुचले हुए घास के पत्ते (trampled grass blades)”
