Clothes ready to wear people

Drying in the sun

हो रहे तैयार
कपड़े
इंसान पहनने को
धूप में
सुबह
फिर से जीने को
हैं तैयार

आज कौन होगा
कैसा होगा
हर के नाप का एक है
एक घर है
एक इंसान है
जिसकी ज़िंदगी को जीने
हैं तैयार

उसकी महक
उसकी गंध
अपने में पिरोए
कभी उसके
जाने के बाद
महकने को
हैं तैयार

कभी नया
कभी पुराना
उस मौक़े के लिए
या किसी की याद
हर लम्हे
को लिए
हैं तैयार

आस्तीन में
छिपाये आंसू
ख़ुशी के
दुख के
वो सारी धड़कने
हाँ सब ओढ़े हुए
है तैयार

आज जल्दी उठे हैं
सुबह
धूप में
कुछ छिपाने
कुछ सजाने
ज़िंदगी का मज़ा लेने
हैं तैयार

Published by Echoes of the soul

I am a dreamer I weave tales in my mind I am connected to you through these words And through this screen across the virtual world

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