
कुछ नज़ारे
फ़ुरसत माँगतीं हैं
कुछ नज़ारे
वो नज़र माँगतीं हैं
कुछ राहें
मंज़िल तक जाती हैं
कुछ राहें
मंज़िलों को भुलाती हैं
ये तुम पर है
क्या देखना है, कहाँ जाना है
कहाँ पहुँचना है
या बस सफ़र करना हैं
ये ज़िंदगी है
कोई ज़िम्मेदारी नहीं
जीना है
निभाना नहीं

Kya baat.. bahut khub 🦋✨
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