हर काम अधूरा करता हूँ हर बार, वक्त से पीछे रहता हूँ कुछ रखता हूँ यादों में और कुछ भुलाया करता हूँ तेरी ही धुन में रहता हूँ यूँ ही, हर वक्त, मगन एक ये काम, मुक्कम्मल बेशक, मैं पूरा करता हूँ
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Kuch der aur. Sona chahta hoon
कुछ पढ़ना नहीं लिखना चाहता हूँ और थोड़ी देर सोना चाहता हूँ … अगर रास्ते में हूँ तुम्हारे तो सरका दो या बैठो मेरे साथ चुप चाप, इत्मिनान से … वक्त को भरना नहीं गुज़रते हुए देखना चाहता हूँ बारिश से बचना नहीं जी भर के भीगना चाहता हूँ … अगर कुछ छींटे तुमपर गिरContinue reading “Kuch der aur. Sona chahta hoon”
Run #elfchen #shayari
किस मंज़िल की तरफ़ है दौड़कौनसा ठिकाना है किसकी मंज़ूरी के मौताज हैं किसको दिखाना है RunningAs fastIn unexplainable hasteTrying perpetually to reachTired #elfchen #shayari
