Koshish

किसी ने की कोशिश दो कदम चलने की  उस नुक्कड़ पर  फिर से मिलने की  कोई कदम  पहुँचे ही नहीं … किसी ने की कोशिश  लिखे ख़त को पड़ने की पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की  कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से  निकले ही नहीं  … किसी ने की कोशिश  दबी आवाज़ों को सुनने की अनकहे लफ़्ज़ोंContinue reading “Koshish”

नयी सुबह

कुछ खो सा गया हैऐसा एहसास है।क्या कोई चमन थाजो खो गया है? खून की बारिशकुछ थम सी गई है,खुला आसमानकुछ नया सा लगता है। खौफ का आलमकुछ ऐसा था कि,इस खामोश अमनकी आदत नहीं थी। हालात बदलेंगेशक इस बात का हर वक़्त रहा,अपनी खुश नसीबी काअर्से से एतबार नहीं है। इतना झूट से रिश्तागहराContinue reading “नयी सुबह”