बारिश की बूँदें
यूँ ही नहीं गिरा करती
बोझ जब हद्द से गुज़र जाए
तो रो दिया करतें हैं बादल
चेहरे के रंग से दिखता है
उसका सबब
रंग हल्का जो उदास हो जाए
तो रो दिया करतें हैं बादल
बारिश में नाचते बच्चों की ख़ुशी
देखते ही बनती है
ये मंज़र देख के
हंस दिया करतें हैं बादल
बारिश की बूँदें
सब पर बराबर गिरा करती हैं
रंग, जाति, पैसा और मज़हब
कहाँ देखा करतें हैं बादल
बारिश की बूँदें
कहाँ यूँ ही गिरा करते हैं
Published by Echoes of the soul
I am a dreamer
I weave tales in my mind
I am connected to you through these words
And through this screen across the virtual world
View more posts