Kuch der aur. Sona chahta hoon

कुछ पढ़ना नहीं

लिखना चाहता हूँ 

और थोड़ी देर

सोना चाहता हूँ 

अगर रास्ते में हूँ तुम्हारे 

तो सरका दो 

या बैठो मेरे साथ 

चुप चाप, इत्मिनान से 

वक्त को भरना नहीं 

गुज़रते हुए देखना चाहता हूँ 

बारिश से बचना नहीं 

जी भर के भीगना चाहता हूँ 

अगर कुछ छींटे

तुमपर गिर रहीं हो 

तो अपनी खिड़कियां

कस कर बंद करलो 

या आओ

आसमानों की बातें सुनने 

जो बूँदें

टिप टिपाते कह रहीं हैं

फूलों पतों से 

हल्के हवा के झोंके से 

काग़ज़ के उड़ते हुए

टुकड़ों से

क़तार में खड़ी

गाड़ियों से 

भीड़ में चलती

इंसानियत से

उनकी कहनी

उनकी ज़ुबानी

सुनना चाहता हूँ

सबसे मिलना चाहता हूँ 

जीने का हर मौक़ा 

ढूँढना चाहता हूँ 

मरने कर हर डर 

मिटाना चाहता हूँ 

ज़िंदा हूँ

बस जीना चाहता हूँ 

थोड़ी देर और

बेफ़िक्र सोना चाहता हूँ

Published by Echoes of the soul

I am a dreamer I weave tales in my mind I am connected to you through these words And through this screen across the virtual world

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