कुछ पढ़ना नहीं
लिखना चाहता हूँ
और थोड़ी देर
सोना चाहता हूँ
…
अगर रास्ते में हूँ तुम्हारे
तो सरका दो
या बैठो मेरे साथ
चुप चाप, इत्मिनान से
…
वक्त को भरना नहीं
गुज़रते हुए देखना चाहता हूँ
बारिश से बचना नहीं
जी भर के भीगना चाहता हूँ
…
अगर कुछ छींटे
तुमपर गिर रहीं हो
तो अपनी खिड़कियां
कस कर बंद करलो
…
या आओ
आसमानों की बातें सुनने
जो बूँदें
टिप टिपाते कह रहीं हैं
…
फूलों पतों से
हल्के हवा के झोंके से
काग़ज़ के उड़ते हुए
टुकड़ों से
क़तार में खड़ी
गाड़ियों से
भीड़ में चलती
इंसानियत से
…
उनकी कहनी
उनकी ज़ुबानी
सुनना चाहता हूँ
…
सबसे मिलना चाहता हूँ
जीने का हर मौक़ा
ढूँढना चाहता हूँ
…
मरने कर हर डर
मिटाना चाहता हूँ
…
ज़िंदा हूँ
बस जीना चाहता हूँ
थोड़ी देर और
बेफ़िक्र सोना चाहता हूँ

