
मेरी हस्ती का है
रोशनी का दायरा
रोशनी से लिपटा
अंदर, साये से भरा
रोका है
मैंने रोशनी को
नादान,
उसके सामने खड़ा
तिनका
उस रोशनी में
रोक कर समझूँ
अपने को बड़ा
ना हूँ मैं
तो हो सिर्फ़ रोशनी
पहचान जाऊँ जब
अपनी असल कहानी
नयी सुबह की भोर में
दायरा सिकुड़ जाएगा
बस रोशनी होगी
साया पिघल जाएगा
If there was no me,
will there be a shadow?
Would I lose my shadow
or will I create light?
