
गीले घास पर
पड़े जब नंगे पैर
लगा जैसे
धरती से जुड़ गया हूँ
ओस की ठंडक जैसे
मुझमें घुलने लगी
भीनी भीनी सी
सुबह की धूप भी
आसमानों से जैसे
उसी वक़्त आ पहुँची
उसकी गर्माहट
कुछ नया एहसास
लेके आयी है
खून के सात घुल कर
दिलों की धड़कन
और साँसों में समायी है
कुछ कदम जो चले साथ
हम एक हो गये
उस बगीचे में
बस रह गया
एक महकता
सुंदर एहसास
