Koshish

किसी ने की कोशिश दो कदम चलने की  उस नुक्कड़ पर  फिर से मिलने की  कोई कदम  पहुँचे ही नहीं … किसी ने की कोशिश  लिखे ख़त को पड़ने की पन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने की  कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से  निकले ही नहीं  … किसी ने की कोशिश  दबी आवाज़ों को सुनने की अनकहे लफ़्ज़ोंContinue reading “Koshish”