
किसी ने की कोशिश
दो कदम चलने की
उस नुक्कड़ पर
फिर से मिलने की
कोई कदम
पहुँचे ही नहीं
…
किसी ने की कोशिश
लिखे ख़त को पड़ने की
पन्नो पे महके अल्फ़ाज़
समझने की
कुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से
निकले ही नहीं
…
किसी ने की कोशिश
दबी आवाज़ों को सुनने की
अनकहे लफ़्ज़ों को समझने की
कुछ शोर,
कुछ कहते ही नहीं
…
किसी को सुनाई दिया
किसी से हुई मुलाक़ात
किसी को आया समझ
किसी की नियत ही नहीं

