She waits

Amma

वो इंतज़ार करती है 

ना जाने क्यों, 

वो राह तकती है

…

नहीं आयेंगे, बड़ी दूर हैं 

ये जानती है 

फिर भी, 

मानने से इनकार करती है

…

अब नहीं रहे, 

वो नासमझ 

सयाने हो गए हैं 

फिर भी फ़िक्र उनकी 

यूँ ही रोज़ाना किया करती है

…

कहाँ है वक्त 

इस भागती दुनिया में 

बैठ के बातें करने की ख्वाहिश 

बेफ़िज़ुल हर रोज़ इज़हार करती है

…

अभी कुछ 

चलने में दिक्कत है 

कुछ कम भी सुनाई देता है 

दवाइयों का असर कम है 

मिलने की ख़ुशी से ही 

तन्दरुस्त हुआ करती है

…

कुछ माँगती नहीं 

वक्त के सिवा 

माँ है 

बस बेपनाह 

वो हमसे प्यार करती है

…

वो इंतज़ार करती है 

ना जाने क्यों 

वो राह तकती है 

Published by Echoes of the soul

I am a dreamer I weave tales in my mind I am connected to you through these words And through this screen across the virtual world

Leave a Reply