इन उँगलियों पे लिपटी वो हसरत भरे नरम हाथ मासूम नज़रों से ताकती वो नज़र और वो एहसास आज भी वैसे ही है दौड़ के सीने से लगना खुश हो कर कंधो पर झूल जाना …
Aaj bhi vaisa hi
aaj bhi
इन उँगलियों पे लिपटी वो हसरत भरे नरम हाथ मासूम नज़रों से ताकती वो नज़र और वो एहसास आज भी वैसे ही है दौड़ के सीने से लगना खुश हो कर कंधो पर झूल जाना …
Aaj bhi vaisa hi
aaj bhi
I am a dreamer I weave tales in my mind I am connected to you through these words And through this screen across the virtual world View more posts